ये बस एक कोशिश है...
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दो वक़्त की रोटी कितने ये सितम देती
दो वक़्त की ये रोटी !!
देखो दुनिया वालो क्या क्या ये गुल खिलाती
दो वक़्त की ये रोटी !!!
1. हर कोई लड़ रहा है अपने नसीब से
जीवन का यही मतलब है सबके वास्ते -२
दिन रात की वो मेहनत क्या क्या गुल खिलाती
दो वक़्त की ये रोटी !!!
2. मासूम चेहरों की जिंदगी है क्या
क्या क्या नहीं करते बच्चे हुए तो क्या -२
खुदा ने क्या लिखा इनकी कहानी
दो वक़्त की ये रोटी !!!
३। ये भी सपने बुनते है अपनी आँखों से
पर टूट के बह जाते है इन्ही आँखों से -२
टूटे अश्को की माला यु ही पिरोती
दो वक़्त की ये रोटी !!!
4. जेहन मैं सभी के है इक सवाल
कैसे कटेगा ये जीवन कौन देगा साथ - २
जीवन की है एक ही चुनौती
दो वक़्त की ये रोटी !!!
कितने ये सितम देती दो वक़्त की ये रोटी ................
Thanks
Jitu Tomar